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अप्रैल, मई व जून माह रहती है राजस्थान में रौनक – इस साल न मेले, न प्रतिष्ठा, न शादी ब्याह न पकवानों की महक।

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Rajasthani Roti

कोरोना महामारी के चलते सम्पूर्ण लॉक डाउन का समय है, लॉक डाउन को 50 दिन से ज्यादा हो गये है। अप्रैल, मई व जून माह वर्ष में ऐसे महीनें है, जब दूर दराज प्रदेशों से लोग अपने वतन यानी अपने गाँव लौटते हैं। इसी दौरान बसों, ट्रेनों, फ्लाइटों के साथ छोटी मोटी गाड़ियों में प्रवासियों का आवागमन चरम पर होता है। कोई शहर से गाँव जा रहा है, तो कोई गाँव से अपने काम निपटाकर पुन: शहर जा रहा है। जन्मभूमि से कर्मभूमि व कर्मभूमि से जन्म भूमि के दरम्यान यह अवसर भागदौड़, उत्साह, उमंग व खुशियों का अवसर होता है। राजस्थान व राजस्थानी दोनों केलिए होते है यह खास दिन।

Rajasthani Khana

Rajasthani Khana

अप्रैल, मई व जून माह रहती है राजस्थान में रौनक – इस साल नहीं बने पकवान, न सजे मंदिर —
बच्चों की छूट्टियों के दिन होते हैं, लिहाजा वर्ष भर अपनी कर्मभूमि में जी-जान से मेहनत करने वाला हर प्रवासी व्यापारी, मजदूर, गरीब व अमीर सब… इन छुट्टियों में अपने गाँव, अपने वतन लौटना चाहते हैं। हर कोई अपने बच्चों के साथ अपनी जन्मभूमि आने को आतुर रहता है। जिन लोगों के बेटे-बेटियां बालिग है, वह उनके रिश्तों की कोशिश भी इन्हीं छुट्टियों में अपने गांव व सगे संबंधियों में तलाश करते हैं।

Rajasthani Pakavan Khana

Rajasthani Pakvan

खुशियों के दिन होते है यह, रिश्तें बनते हैं, इन्हीं दिनों में शादिया होती है, इन्हीं दिनों में गांव के मंदिरों के वार्षिक मेले होते हैं, इन्हीं दिनों में नए मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा भी होती है, इन्हीं दिनों में हवन होते हैं, इन्हीं दिनों में विशेष पूजा अर्चना होती हैं, इन्हीं दिनों नए घरों में गृह प्रवेश होते हैं, इन्हीं दिनों में विशेष भजन संध्या का आयोजन होता है व इन्हीं दिनों में सामाजिक-धार्मिक समारोह भी सम्पन्न होते है। यू कहे कि इन दिनों राजस्थान राजस्थानियों का स्वागत करता है तो गलत नहीं होगा।

अप्रैल, मई व जून क्यों है राजस्थान के लिए खास ? —
वैसे तो दूसरे प्रदेशों के बारे में ज्यादा जानकारी मुझे नहीं है, परन्तु राजस्थान में यह गर्मी के दिन उमस के साथ-साथ खुशियों की सौगात लेकर आते हैं। प्रदेश से प्रवासियों की भीड़ अपनी मातृभूमि में आने के कारण यहाँ का हर छोटा-मोटा व्यवसायी खुश होता है, क्योंकि उनका व्यापार भी इन्हीं दिनों चरम पर पहुँचता है। कपड़ों की दुकान हो या रेडिमेड गारमेंट की दुकान, सोने चाँदी के जैवरात की दुकान हो या गिफ्ट आर्टिकल की दुकान, पूजा पाठ सामग्री की दुकान हो या किराणा की, खाने का रेस्टोरेंट हो या ठहरने की की होटल, फ्रुट्स की लॉरी हो या नाश्ते की लॉरी…. चारों तरफ सिर्फ खुशियां ही खुशियां।

Rajasthani Besan Pakoda

Rajasthani Pakoda

राजस्थान में इन दिनों रौनक चरम पर होती है। कोई शादी में जा रहा है, कोई मेले में, तो कोई प्रतिष्ठा में जा रहा है। भीषण गर्मी के दिनों में राजस्थान में प्रवासियों का आगमन हमेशा सुखद होता है। क्या दिन होते हैं, अपनों से अपनों का मिलन, अपनों के साथ खुशियों में शामिल होना, मिलना-बिछुड़ना। इन दिनों पकवानों की पूछो ही मत! शादी ब्याह में विभिन्न प्रकार के व्यंजनों की खुश्बू (खुशबू) लोगों का मन महकाती है।

राजस्थान के पकवानों की खुशबू —
शादी ब्याह, सामाजिक व धार्मिक उत्सवों में भोजन तो अनिवार्य रूप से होता है। पुड़ी, सब्जी, चिक्की, बूंदी, बेसन के लड्डू, चूरमा के लड्डू, गुलाब जामुन, रसगुल्ले, काजू कितली, ड्रॉय फ्रुट्स स्वीट, साउथ इंडियन डिशेज, पंजाबी सब्जियां, लस्सी, आइसक्रीम, आम रस, भेलपुड़ी, चाट मसाला व विभिन्न प्रकार के सजे काउंटर इन दिनों खाने की खुशबू को और ज्यादा महकाते हैं। आमंत्रण पत्रों के तो ढेर लग जाते हैं, कई बार तो ऐसी स्थिति आती है तो एक दिन में चार से पाँच जगह भोजन…. वाह! राजस्थान व राजस्थानी के लिए यहाँ के पकवान मायने रखते हैं।

Rajasthani Besan Chikki

Rajasthani Besan Chikki

राजस्थान की यह खुशी इस बार काफूर हो गई है। कोरोना महामारी के चलते लोगों के व्यवसाय ठप्प है। पकवान तो छोड़िए, मध्यम वर्गीय लोगों को घर में रोटी-सब्जी बमुश्किल नसीब हो रही है। न कई आना न जाना, न शादी न कोई कार्यक्रम, न भोजन न आइसक्रीम। अपने, अपनों से मिलने हेतु तरस रहे हैं। सड़कें विरान है, रेलगाड़िया बंद है… यह खुशिया इस साल नसीब नहीं हुई न होने वाली है क्योंकि संकट अभी टला नहीं है। वैसे तो राजस्थान व राजस्थानी हिम्मत नहीं हारते लेकिन यह समय अलग है।

Rajasthani Bhojan

जान है तो जहान है, की तर्ज पर हर कोई अपने बचाव में लगा है। बावजूद इसके राजस्थान से दूर यहां के प्रवासियों के मन में पीड़ा जरूर है। राजस्थान के पकवानों की महक उन्हें इस बार ललचा तो रही है, साथ ही साथ एक संदेश भी दे रही है कि समय से बढ़कर कोई नहीं है। ईश्वर के एक कोरोना ने समस्त मानव जाति को इतना बेबस व लाचार कर दिया है तो सोचिए कि ईश्वर के पास कितने कोरोना होंगे?

Lapasi Dal Sira

Rajasthani Lapsi Dal
chira

फिर लौटेगी खुशियां —
हम सही मायने में इंसान कहलाने के योग्य तब होंगे जब इस संकट की घड़ी में अपने घर के पास किसी गरीब व लाचार को भूखा न रहने दे। यदि किसी गरीब, भूखे व लाचार व्यक्ति को देखकर हमारा मन नहीं पसीजे तो समझ लेवे कि हमारे भीतर का मानव मर चुका है। आईए, संकट की इस घड़ी में एक दूसरे का साथ देवे, जरूरतमंद की मदद करें, किसी को भूखा न रहने देवे। संकट का समय है यह भी टल जायेगा। धैर्य रखें, हौसला रखें व विश्वास रखें कि हम इस महामारी से जीतकर पुन: उसी जोश के साथ इस साल न सही, अगले साल हम खुशियों के पकवान अवश्य खायेंगे।

Rajasthani Pakvan

Rajasthani Pakwan

अमावस्या के बाद पूर्णिमा आएगी,
पतझड़ के बाद बहार भी आएगी,
संकट की घड़ी है जल्द टल जाएगी,
आज गम है तो कल खुशियां भी आएगी।

अपनो के आने की खबर भी आएगी,
गांवों की रौनक फिर से लौट आएगी,
अपनों से गले लगने की घड़ी भी आएगी,
मेरी माटी की खुशबू भी जरूर आएगी।

रेलगाड़ियों में भीड़ फिर लौट आएगी,
अपनों की आवाज़ वतन बुलाएगी,
बच्चों की छुट्टियां भी पुनः लौट आएगी,
पकवानों की वह महक फिर से आएगी।

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Chamcha Chamche
रोचक11 months ago

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कोरोना (Coronavirus Covid 19) से बचने के उपाय – हमें अपनी जीवनशैली में आवश्यक बदलाव करना ही होगा।

Rajasthani Roti
देश विदेश11 months ago

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मदर्स-डे !! – माँ शब्द के मायने क्या है? मेरे लिए ‘माँ’ हर युग में सिर्फ ‘माँ’ है।

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